गीता जयंती समारोह Geeta jayanti samaroh 2022 Kurukshetra
19 अक्टूबर 2022 से 6 दिसंबर 2022 तक गीता जयंती समारोह चल रहा था
हमने कई दिन पहले ही जाने का प्लान बना लिया था परंतु व्यस्तता के चलते हम जा नहीं पाए फिर भी आखिरकार नुवासा ने निर्णय लिया कि हम शनिवार के दिन अवश्य ही चलेंगे काम तो ऐसे ही चलता रहेगा। कल शनिवार के दिन 3 दिसंबर 2022 को जाने की स्कीम बनी। पता नहीं था कि हम उचाना रेलवे स्टेशन से जाएंगे या नरवाना से बैठकर जाएंगे और नवासा हमें आगे से मिलेगा। परंतु 1 दिन पहले काला ने बताया कि काम अधिक होने के कारण मैं नहीं जा पाऊंगा और मैं काम करूंगा, तुम चले जाना। फिर मैं शनिवार को सुबह बाइक द्वारा घर से गया और नरवाना रेलवे स्टेशन पर बाइक रोकी। वहां से नीशू बाइक ले गया और मधु को छोड़ने आया मैंने पहले ही UTS से ऑनलाइन काट दी थी, ट्रेन से कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुए।
उस दिन 3 दिसंबर था तो गीता जयंती इसी दिन को मनाया जाता है और वहां पर कोई मंत्री या विधायक भी आने वाले थे इसीलिए भी भीड़ अत्यधिक थी एवं सबसे अधिक स्कूली बच्चे थे जो कि रेल के डिब्बे में भी शरारत करते हुए जा रहे थे और जो बच्चे होते हैं उनको रोक भी कौन सकता है। वह कभी ऊपर वाली सीट पर बैठ जाते हैं और अपने जूते तक नहीं उतारते जिससे मिट्टी सभी के ऊपर झड़ जाती थी, सीट पर कभी नमकीन गिरा देते थे परंतु उनका किसी ने बुरा नहीं माना। इतनी भीड़ में भी हमें सीट मिल गई थी। मैंने भी रास्ते में नवासा से बात की के रेल द्वारा आ रहे हो या बस द्वारा, तो वह बस द्वारा कुरुक्षेत्र पहुंच रहे थे।
जैसे ही बस थनेश्वर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे भीड़ बहुत ज्यादा थी। रेल को कई देर तक रुके रहना पड़ा परंतु वह सारी सवारी उतार कर जाने वाले थे। ऐसा प्रतीत हो रहा है कहीं पैर रखने की जगह नहीं है इसलिए मैंने बोला कि थोड़ा आराम से चलेंगे, शांति के साथ ताकि यह भीड़ पहले चली जाए और हम आराम से गुजर सके। हमें यहां से ब्रह्मसरोवर तक जाने के लिए धक्का-मुक्की न करनी पड़े।
हम जाट धर्मशाला के पास से होते हुए ब्रह्मसरोवर पर पहुंचे परंतु अबकी बार हम दांई तरफ वाले गेट से ही अंदर गए। ब्रह्मसरोवर को एक मंडप, शादी वाले पंडाल की तरह सजाया गया था और हर जगह साफ-सफाई थी और बिल्कुल सामने ही स्कूल के बच्चे किसी न किसी रूप में महाभारत के व्यक्तित्व का रूप धारण किए खड़े थे कोई द्रौपदी बना था कोई भी कोई अर्जुन कोई श्रीकृष्ण कोई संजय बहुत अच्छे लग रहे थे। लोग सेल्फी ले रहे थे फोटो ले रहे थे उनके साथ। हम आगे स्टाल की तरफ बढ़ गए और अलग-अलग स्टॉल को उनके सामान के साथ देखते रहे। हमने सबसे पहले बाईं तरफ हो रहे एक प्रोग्राम को देखा जिसमें मध्य प्रदेश का लोक नृत्य, मध्य प्रदेश के लोगों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा था। इस बार गीता जयंती समारोह 2022 का थीम स्टेट मध्यप्रदेश था और स्पेशल मध्य प्रदेश का प्रांगण बनाया जा रहा था जहां पर दिन रात वहां के कार्यक्रम चलते थे।
मध्य प्रदेश का लोक नृत्य देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
मध्य प्रदेश के लोक नृत्य के बाद लेह लद्दाख का लोक नृत्य आया जो कि बहुत ही अच्छा लगा और मैंने कुछ वीडियो भी बनाई और अपने यूट्यूब चैनल रामू कवि किसान नचार खेड़ा जींद हरियाणा पर डाली और उसके बाद फिर उत्तराखंड का पांडव नृत्य आया फिर प्रोग्राम समाप्त हो गया था।
लेह लद्दाख का लोक नृत्य देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
हम आगे स्टालों को देखते हुए जा रहे थे जहां पर सबसे अधिक तो हरियाणा के स्वयं सहायता का समूह द्वारा बनाए गए उत्पादों को दिखाया गया था, जोकि वास्तव में बहुत ही बेहतरीन और अच्छे थे और हरियाणवी संस्कृति से जुड़े होने का एहसास करा रहे थे। मिट्टी के बर्तन प्रकृति के फूल पौधे गमले चप्पल सूट कपड़ा पायदान और खाने-पीने की सामग्री तैयार हो रही थी खिलौने रखे थे माला छाप कड़े आदि भी थे।
एक जगह पर जलवायु एवं पर्यावरण विभाग हरियाणा में धरती को हरा भरा रखने के लिए और इसकी सुंदरता को बनाए रखने के लिए जैविक उत्पादों और भूमि संरक्षण आदि के बारे में स्टाल लगाया हुआ था जिस पर सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल को न कहने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था। मैंने वहां पर अपने हस्ताक्षर किए और इस कड़ी से जुड़ा और यह हम सब के लिए प्रेरणा है यह हमें सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल का प्रयोग कम से कम करना चाहिए क्योंकि यह पृथ्वी के लिए नुकसानदायक है।
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| सिंगल यूज प्लास्टिक बैग थर्माकोल के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान |
हम लाइन में दाईं तरफ से घुसे थे तो उल्टा चक्कर लगा रहे थे और नवासा बाई तरफ से आया था जब हमने उसको फोन किया तो उसने बताया कि हम इस साइड में है और हमने 200 नंबर स्टाल पर पहुंचकर मिलने का प्लान बनाया और हम निर्धारित समय पर बिना एक-दूसरे को कॉल किए भी एक साथ वहीं पर पहुंचे और वहां पर बातचीत की, आगे कितनी देर और लगानी है क्या-क्या देखना है और शाम को कैसे चलना है?
हम बाहर जाने के लिए मेन गेट की तरफ बढ़ने लगे तो वहां पर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव 2022 लिखा हुआ था, जो की बहुत ही सुंदर रंगोली और कलाकारी की गई थी। हर बार यहां पर मेन गेट पर ऐसे ही लिखते हैं और उनके गेट को बहुत अच्छे तरीके से सजाया गया था साथ में ही वहां पर नगरपालिका की गाड़ी से धुएं का छिड़काव भी किया जा रहा था ताकि किसी प्रकार के जीवाणु किटाणु विषाणु नुकसान न पहुंचाएं।
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| रामू कवि किसान अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव 2022 कुरुक्षेत्र में |
दोपहर के 2:00 बज चुके थे तो हमें भूख लग चुकी थी इसलिए हमने खाना खाने का मन बनाया और हम जाट धर्मशाला की साइड में बिल्कुल बाहर की तरफ आए और बाएं तरफ 3 ढाबे हैं, हमने वहां पर खाना खाया क्योंकि वहां पर ढ़ाब्बावाला बेहतरीन खाना मिलता है और अंदर की साइड में इतना कुछ खाने पीने का नहीं है। हालांकि हमने हल्का-फुल्का कुछ खा लिया था ब्रह्मसरोवर पर भी, परंतु भूख तो अपनी रोटी खाने से ही मिटती है। खाना खाकर हम बच्चों के लिए सामान लेने निकले तो फिर भी काफी देर लग गई और हम काफी सारा सामान लेकर आए हालांकि हमने मन बनाया था कि ज्यादा सामान नहीं लेंगे, नहीं तो इसको उठाए रखना पड़ेगा और परेशानी होगी।
जब तक हमने सामान खरीदा तो काफी देर हो चुकी थी और 6:00 बजने वाले थे और हम 6:00 बजे के रेल से जाने वाले थे परंतु मैंने नवासा को कॉल किया की भीड़ कितनी है तो उसने बताया कि बहुत अधिक भीड़ है और इसलिए हमने सोचा कि रात को रुकना तो यहीं पर है कैथल में नवासा के पास तो क्यों न हम 8:00 वाली रेल से जाएंगे और हमने 2 घंटे और देखने का मन बनाया तो फिर हम जहां पर रथ है उस दिशा में आगे बढ़ गए। क्योंकि हमारे पास 2 घंटे और थे और हम रथ के पास फोटो खिंचवाने वाले थे परंतु सबसे अत्यधिक अच्छी बात यह हुई कि वहां पर हरियाणवी मंडप लगा हुआ था और साथ में जितने भी हरियाणा के सरकारी विभाग से सबका वहां पर स्टाल था। सबने अपने-अपने विभाग से संबंधित चीजों को दिखाया था जैसे सिंचाई विभाग आईटीआई विभाग पशुपालन विभाग डेयरी विभाग कृषि विभाग मछली विभाग महिला सशक्तिकरण विभाग नवीकरण ऊर्जा विभाग हार्टरोंन आईटी विभाग।
इन सब विभागों को देखने के बाद हम हरियाणा मंडप में पहुंचे जिसमें हरियाणवी संस्कृति से संबंधित पुरानी विरासत को संजोए हुए बहुत सी चीजों को दिखाया गया था जैसे कि दादी के जमाने के गुल्लक संदूक ताले किसानी के लिए प्रयोग होने वाली दरांति हल फाल गंडासी बिजने, पुरानी तखड़ी मश्क और बजाने के वाद्य यंत्र सारंगी हारमोनियम पियानो और वहां पर रेडुए खड़े हुए थे। मैंने उनकी भी कुछ वीडियो बनाई और यूट्यूब चैनल पर डाली। फिर वहां से हम बाहर निकल रहे थे तो हमारी नजर मध्यप्रदेश के मंडप प्रांगण पर पड़ी, वहां पर कुर्सियां लगाई हुई थी और लगातार मध्य प्रदेश राज्य की संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम वहां पर चल रहे थे तो इन 2 घंटों का सदुपयोग हो गया, जितना मजा पूरे दिन में आया तो इन 2 घंटों में भी अधिक खुशी मिली और बहुत कुछ देखने को मिला।
फिर हमने 8:00 वाली ट्रेन की टिकट बुक की और हम थानेश्वर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए परंतु यहां पर नरवाना के और यात्री भी थे उन्होंने बताया कि आने वाली यहां पर नहीं रुकती है और जिसे आने में सिर्फ 15 मिनट शेष थे, तो हम कुरुक्षेत्र के लिए ईरिक्शा से रवाना हुए और हमारे पहुंचते ही रेल चल पड़ी। टीटी वह रेल पुलिस वालों ने मना कर दिया कि हम ट्रेन को रुकवा देंगे और आप चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश मत करना और उन्होंने हमारे लिए ट्रेन को रुकवा दिया और हम आराम से जनरल डब्बे में सवार हो गए। हालांकि उस डब्बे में भीड़ काफी थी और हमें खड़े होकर यात्रा करने पड़ी। रात के 9:00 बजे हमसे और नुवासा के पास ही किया और सब से बातचीत की।


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